दानिया ख़ान: एक पहल
आर.टी.आई. (सूचना का अधिकार) क्यों?
मैं हमेशा से यह मानती आई हूं कि सच्ची शक्ति, सच्चाई को जानने में होती है। भारत जैसे विशाल और जटिल देश में — जिसकी प्रशासनिक प्रणाली औपनिवेशिक विरासत से प्रभावित है — सूचना अक्सर कागज़ी कार्यवाही, अस्पष्ट नियमों और अनुत्तरित सवालों की परतों में दब जाती है।
‘सूचना का अधिकार (RTI)’ ऐसा उपकरण है जो आम नागरिकों को कानूनी रूप से सवाल पूछने और उत्तर पाने का अधिकार देता है।
RTI केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक सशक्त माध्यम है — खासकर उन लोगों के लिए जो अक्सर नजरअंदाज किए जाते हैं या हाशिये पर रहते हैं। चाहे बात राशन कार्ड की हो, स्कूल में दाखिले की, लंबित सरकारी योजनाओं की, या फिर सड़क के गड्ढे भरवाने की — RTI सिस्टम को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सहभागी बनाता है।
मैंने इस प्रोजेक्ट पर दो वर्ष पहले काम करना शुरू किया, जब मुझे एहसास हुआ कि यह कितना प्रभावशाली माध्यम है — लेकिन दुर्भाग्य से बहुत कम लोग, विशेषकर वंचित समुदायों से, इसे सही तरीके से इस्तेमाल करना जानते हैं।
सूचना के अधिकार से मेरा पहला परिचय एक लेख पढ़ने से हुआ। उस लेख ने मेरी जिज्ञासा को और बढ़ाया और मुझे यह महसूस हुआ कि यह कानून आम नागरिकों के जीवन में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है। इसके बाद मैं आरटीआई एक्टिविस्ट श्री अनिल गलगली जी के संपर्क में आयी। उन्होंने न केवल मुझे इस अधिनियम के प्रावधानों से अवगत कराया बल्कि इसके व्यावहारिक उपयोग और सीमाओं को भी सरल भाषा में समझाया। उनके मार्गदर्शन से मुझे यह एहसास हुआ कि सूचना का अधिकार केवल एक कानूनी व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को सशक्त बनाने और व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का एक शक्तिशाली साधन है।
आगे चलकर मुझे श्री अमोल कडु जी के साथ कई कार्यशालाओं में भाग लेने का अवसर मिला। इन कार्यशालाओं में मैंने प्रत्यक्ष रूप से देखा कि किस प्रकार साधारण नागरिक भी सूचना के अधिकार के माध्यम से अपने मुद्दे सामने रखकर व्यवस्था से जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं। यह अनुभव मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा। इसने मुझे यह सिखाया कि जब नागरिक जागरूक और संगठित होते हैं, तो समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिलती है, और लोकतंत्र वास्तविक रूप से जीवंत होता है।
इस वेबसाइट और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से मेरा उद्देश्य है कि RTI को सरल, सुलभ और व्यवहारिक बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग पहला कदम उठा सकें — यानी सही सवाल पूछना।
मेरे बारे में
लेखिका, ब्लॉगर और शोधकर्ता
नमस्ते! मैं दानिया खान हूं, और मेरे बारे में एक बात जो आपको ज़रूर जाननी चाहिए — अगर मुझे कोई चीज़ पसंद आ जाए, तो मैं उसे पूरा करके ही मानती हूं, चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न हो।
मुझे किताबें पढ़ना बेहद पसंद है। इसी जुनून के चलते मैंने इंस्टाग्राम पर एक अकाउंट शुरू किया, जिसमें मैं किताबों की समीक्षा करती हूं, उनके बारे में बात करती हूं और दूसरों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करती हूं। लॉकडाउन के दौरान मैंने अपने बिल्डिंग में एक कम्युनिटी लाइब्रेरी शुरू की और बाद में मुंबई के आशा सदन में भी एक पुस्तकालय स्थापित किया।
पढ़ने के साथ-साथ मुझे लिखने का भी बहुत शौक है। मेरी एक कविता संग्रह ‘Labyrinth’ प्रकाशित हो चुकी है, जिसमें मानवीय भावनाओं की गहराइयों को छूने वाली कविताएं शामिल हैं। वर्तमान में मैं लघु कहानियाँ और निबंध जैसी गद्य विधाओं पर अधिक काम कर रही हूँ।
मुझे तर्क-वितर्क (debating) में भाग लेना भी बहुत पसंद है। शायद यही कारण है कि मैंने पेशेवर स्तर पर वाद-विवाद करना शुरू किया और टीम इंडिया डिबेटिंग स्क्वाड का हिस्सा बनी।
लेकिन इन सबसे बढ़कर, मुझे नींद लेना पसंद है — और इसमें मैं वास्तव में बहुत अच्छी हूं।
RTI कार्यशाला





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